पशुओं में होनें वाले मोतियाबिन्द एवं अन्धापन रोग और उससे बचाव

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पशुओं की आँख के लेन्स में उजलापन या धुँघलापन आना मोतियाबिन्द कहलाता है। इस रोग से प्रभावित पशु के आँख से घुँघला दिखायी पड़ता है तथा धीरे-धीरे पशु अन्धा हो जाता है।

रोग का कारण एवं प्रकार

यह रोग निम्न कारणो एवं प्रकार से हो सकता है:

  1. जन्मजात यह रोग पिल्लों में जन्म से ही हो जाता है।
  2. आनुवांशिक यह कुछ नस्लों में यह आनुवांशिक होता है।
  3. आघातिक नुकीली वस्तु को आँख के लेन्स में लगने के कारण यह रो हो जाता है।
  4. सूजनी आँख के लेन्स के साथ परिकारिता के चिपक जाने के कारण भी यह रोग हो जाता है।
  5. मधुमेही पशु शरीर में शर्करा की मात्रा अधिक होने पर यह रोग हो जाता है।
  6. क्लोरप्रोमाजीन औषिध के अधिक समय तक सेवन के कारण भी यह रोग हो जाता है।
  7. वृद्धावस्था में कुत्तों में यह रोग अधिक पाया जाता है।
और देखें :  पशुओं की आँखों को प्रभावित करने वाले रोग एवं उनका निदान

रोग के लक्षण प्रभावित पशु के आँख के लेन्स पर सफेदी जमा हो जाती है। आँख में घुँघलापन आ जाता है जिसके कारण पशु को कम दिखायी पड़ता है और अन्त में अंधा हो जाता है। जिसके कारण पशु चलने-फिरने में असमर्थ होता है एवं खाने पीने में कठिनाई का अनुभव करता है। उपचार प्रभावित पशु की आँख की शल्य चिकित्सा द्वारा ही उपचार सम्भव है।

पशुओं का अन्धापन

पशुओं में आँख से नहीं दिखायी देना अन्धापन कहलाता है। रोग से प्रभावित पशु इधर-उधर भटकता रहता है, खाने पीने में असमर्थ होता है और अपनी जगह पर नहीं पहुँचता है। रोग का कारण यह रोग पशुओं में जन्मजात या अर्जित हो सकता है। विटामिन ’ए’ की कमी, श्वेत मण्डल की सफेदी, केटरैक्ट एवं मस्तिरक रोगों के कारण भी यह रोग हो सकता है। पशुओं में होने वाली वानस्पतिक एव केमिकल विषाक्त्ता इस रोग का कारण बन सकती है। आँख में लगने वाली चोट से भी यह रोग हो जाता है।

और देखें :  पशुओं में पूयगर्भाशयता (पायोमेट्रा): कारण एवं निवारण

रोग का प्रकार यह दो प्रकार से होता है

  1. दिन का अन्धापन या दिनौघीं या हेमेरालोपिया इसमें पशु को दिन में दिखायी नहीं पड़ता है।
  2. रात का अन्धापन या रतौंधी या निक्टालोपिया इससे प्रभावित पशुओं को रात में नहीं दिखायी पड़ता है।

उपचार  प्रभावित पशुओं का रोग के कारणों के अनुसार उपचार करना चाहिए। विटामिन ’ए’ की कमी होने पर विटामिन ’ए’ की सूई लगाने से या दाने में मिलाकर देने से लाभ मिलता है। कैटारैक्ट के कारण अन्धेपन में शल्य चिकित्सा से एवं चोट लगने के कारण होने वाले अन्धेपन में ऐन्टीबायोटिक दवाओं का उपयोग करने से लाभ मिलता है।

और देखें :  पशुपालन में स्थानीय औषधीय पौधों का महत्व एवं प्रयोग
इस लेख में दी गयी जानकारी लेखक के सर्वोत्तम ज्ञान के अनुसार सही, सटीक तथा सत्य है, परन्तु जानकारीयाँ विधि समय-काल परिस्थिति के अनुसार हर जगह भिन्न हो सकती है, तथा यह समय के साथ-साथ बदलती भी रहती है। यह जानकारी पेशेवर पशुचिकित्सक से रोग का निदान, उपचार, पर्चे, या औपचारिक और व्यक्तिगत सलाह के विकल्प के लिए नहीं है। यदि किसी भी पशु में किसी भी तरह की परेशानी या बीमारी के लक्षण प्रदर्शित हो रहे हों, तो पशु को तुरंत एक पेशेवर पशु चिकित्सक द्वारा देखा जाना चाहिए।

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