पशुपालन

गाभिन पशु का ग्रीष्म एवं वर्षा ऋतु में पोषण एवं प्रबन्धन

भारत एक कृषि प्रधान देश है। कृषि एवं पशु पालन भारतीय अर्थव्यवस्था में विशेष महत्व रखते हैं, सकल धरेलु कृषि उत्पाद में पशुपालन का 30 प्रतिशत योगदान सराहनीय है, जिसमें दुग्ध एक ऐसा उत्पाद है जिसका योगदान सर्वाधिक है। >>>

पशुओं की बीमारियाँ

डेयरी पशुओं में जेर रुकने की समस्या एवं प्रबंधन

सामान्यतः गाभिन पशुओं में ब्याने के 3-6 घंटे के अंदर जेर स्वतः बाहर निकल आती है, परन्तु यदि ब्याने के 8-12 घंटे के बाद भी जेर नहीं निकला तो उस स्थिति को जेर के रुकने की स्थिति कहा जाता है। जेर की रुकने की समस्या का डेयरी पशु के उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। >>>

पशुओं की बीमारियाँ

पशुओं में पूयगर्भाशयता (पायोमेट्रा): कारण एवं निवारण

जब गर्भाशय में मवाद या म्यूकस मिली मवाद भर जाती है तो ऐसी स्थिति को पूयगर्भाशयता अथवा पायोमेट्रा कहते हैं। ऐसी स्थिति में अंडाशय पर पीत काय/ कार्पस लुटियम बना रहता है तथा पशु गर्मी में नहीं आता है। >>>

पशुओं की बीमारियाँ

मादा पशुओं में प्रसव अवरोध

मादा पशुओं में प्रसव के समय भ्रूण के बाहर निकलने मे अवरोध उत्पन्न हो जाता है। मादा पशु के द्वारा उत्याधिक जोर लगाने पर भी भ्रूण बाहर नही निकलता है। इस अवस्था में भ्रूण के सिर , पैर या शरीर का कुछ >>>

पशुओं की बीमारियाँ

असामान्य या कठिन प्रसव (डिस्टोकिया) के कारण एवं उसका उपचार

ब्याने के समय मां स्वयं बच्चे को बाहर नहीं निकाल पाए और बच्चा बीच में ही फंस जाए तो इसे कठिन प्रसव (Dystocia) कहते हैं। ब्याने की तीन अवस्थाएं होती हैं >>>