पशुओं की बीमारियाँ

बड़े पशुओं में सींग का कैंसर: निदान एवं उपचार

सींग का कैंसर जिसे स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा भी कहा जाता है, एक प्रकार का त्वचा कैंसर है जो सींग के आधार, खासकर सींग और आँख के बीच के क्षेत्र में विकसित होता है। यह रोग धीरे-धीरे बढ़ता है लेकिन समय रहते इलाज न करने पर यह आसपास की हड्डियों, आंखों और मस्तिष्क तक फैल सकता है। >>>

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पशुओं में बांझपन कारण और उपचार

भारत में डेयरी व्यवसाय की उत्पादकता और लाभप्रदता पर पशुओं में होने वाला बांझपन एक प्रमुख चुनौती है। बांझ पशुओं का रख-रखाव किसानों के लिए अतिरिक्त आर्थिक भार बन जाता है, क्योंकि ऐसे पशु अपेक्षित प्रजनन एवं दुग्ध उत्पादन नहीं दे पाते। कई देशों में कम उत्पादक या प्रजनन में असफल पशुओं को झुंड से बाहर कर दिया जाता है। अनुमानतः दुग्ध देने वाले पशुओं में लगभग 10 से 30 प्रतिशत मामलों में बांझपन अथवा अन्य प्रजनन संबंधी विकार देखने को मिलते हैं। इसलिए बेहतर प्रजनन क्षमता, नियमित बछड़ा प्राप्ति तथा अधिक उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए नर और मादा दोनों पशुओं को संतुलित पोषण, उचित प्रबंधन तथा रोग-मुक्त वातावरण उपलब्ध कराना आवश्यक है। >>>

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पशुओं में गर्भपात से बचाव

मृत अथवा 24 घंटे से कम समय तक जीवित भ्रूण का गर्भकाल पूर्ण होने के पूर्व गर्भाशय से बाहर निकलना गर्भपात कहलाता है। गर्भपात गर्भकाल के किसी भी समय विभिन्न कारकों के कारण हो सकता है। >>>

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ब्रुसेलोसिस संक्रमण द्वारा पशुओं में गर्भपात एवं अन्य प्रजनन रोग

ब्रुसेलोसिस पशुओं एवं मनुष्यों दोनों में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण जीवाणुजनित रोग है। यह मुख्यतः प्रजनन तंत्र को प्रभावित करता है तथा पशुओं में गर्भपात, बांझपन एवं अन्य प्रजनन संबंधी समस्याओं का प्रमुख कारण बनता है। >>>

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वर्षा ऋतु में होने वाले पशु रोगों से बचाव

पशुओं में वर्षा ऋतु के दौरान विभिन्न प्रकार के संक्रामक रोगो के होने की प्रबल सम्भवना रहती है जो कि पशुओं की उत्पादन क्षमता पर विपरीत प्रभाव डालतें है। पशु पालकों में इन रोगों एवं इनसे बचाव के उपायों का समुचित ज्ञान होना अतिआवश्यक है >>>

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एल.एस.डी. या गांठदार/ ढेलेदार त्वचा रोग/ लंपी स्किन डिजीज

भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में तकनीकी सलाहकार (राष्ट्रीय गोकुल मिशन) के पद पर कार्यरत डॉ. चंद्रशेखर गोदारा ने बताया कि लंपी स्किन बीमारी या ढेलेदार त्वचा रोग एक वायरल बीमारी है (एलएसडी) >>>

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दुधारू पशुओ मे ब्यांत के पश्चात होने वाली मुख्य बिमारी मिल्क फीवर (दुग्ध ज्वर)

दुग्ध ज्वर एक मेटाबोलिक (उपापचयी) रोग है जिसे अंग्रेजी में मिल्क फीवर रोग कहा जाता है, जो गाय या भैंस में ब्याहने से दो दिन पहले से लेकर तीन दिन बाद तक होता है। परन्तु कुछ पशुओं में यह रोग ब्याने के पश्चात 15 दिन तक भी हो सकता है। मिल्क फीवर पशु के शरीर में कैल्शियम की कमी के कारण होता है। मिल्क फीवर ज्यादातर अधिक दूध देने वाली गाय या भैंस में होता है परन्तु यह रोग भेड़ बकरियों की दुधारू नस्लों में भी हो सकता है। >>>

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खुरपका-मुँहपका रोग तथा दुग्ध एवं मांस उद्योग पर इसका दुष्प्रभाव: संक्षिप्त अंतर्दृष्टि तथा नियंत्रण व निवारण

खुरपका-मुँहपका एक विषाणु जनित संक्रामक रोग है, जो पशुओं के विभिन्न प्रकार जैसे गाय, भैंस, भेड़, बकरी और शूकर में फैलता है। यह रोग पशुओं के संक्रमण दर तक पहुंच सकता है और बछड़ों में 20% तक मृत्यु की दर हो सकती है। >>>

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पशुओं में संक्रमण: दुग्ध उत्पादन पर प्रभाव

वे रोग जो बैक्टीरिया, वाइरस तथा प्रोटोजोआ द्वारा फैलते हैं, संक्रामक रोग कहलाते हैं। छूत से फैलने वाले सभी रोग संक्रामक रोग होते है। प्रमुख संक्रामक रोग निम्न है: खुरपका मुंहपका रोग- यह एक >>>

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गौवंश की महामारी: लंपी स्किन रोग

लंपी स्किन रोग गायों और भैंसों का एक वेक्टर-जनित चेचक रोग है और त्वचा पर गांठों की उपस्थिति लंपी स्किन रोग की विशेषता है। यह रोग कई भारतीय राज्यों जैसे राजस्थान, असम, ओडिशा, महाराष्ट्र, केरल, >>>

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डेयरी पशुओं में जेर रुकने की समस्या एवं प्रबंधन

सामान्यतः गाभिन पशुओं में ब्याने के 3-6 घंटे के अंदर जेर स्वतः बाहर निकल आती है, परन्तु यदि ब्याने के 8-12 घंटे के बाद भी जेर नहीं निकला तो उस स्थिति को जेर के रुकने की स्थिति कहा जाता है। जेर की रुकने की समस्या का डेयरी पशु के उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। >>>

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लंपी स्किन डिजीज

गोवंश में फैलने वाले ठेकेदार त्वचा रोग (लंपी स्किन डिजीज) का खतरा देश प्रदेश में मडराने लगा है। इसका ज्यादा प्रभाव इस समय उत्तर प्रदेश के पड़ोसी राज्य राजस्थान में देखने को मिल रहा है। पशुपालकों ने >>>

Scrub Typhus
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स्क्रब टाइफस: एक पशुजन्य रोग

स्क्रब टाइफस ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी नामक बैक्टीरिया के कारण होने वाली गंभीर बीमारी है। स्क्रब टाइफस संक्रमित चिगर्स (माइट्स) के काटने से इंसानों में फैलता है। इस रोग को बुश टाइफस के नाम से भी जाना >>>

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पशुओं में जननहीनता के कारण एवं लक्षण

जननहीनता पशुओं में प्रजनन की क्षमता कम हो जाती है। कारण 1. शरीर रचना संबंधी कारक (अ) शरीर रचना संबंधी आनुवांशिक कारण 1. अनुपस्थिति डिम्बाशय 2. अल्पविकसित डिम्बाशय 3. अंतर्लिगंता 4. श्वेत ओसर >>>