केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री ने उत्तर भारत के राज्यों के सांसदों के साथ बातचीत की

5
(451)

केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री की अध्यक्षता में आज उत्तर भारत के राज्यों, जम्मू और कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़ और लद्दाख के संसद सदस्यों के साथ एक वर्चुअल बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में पशुपालन एवं डेयरी विभाग, भारत सरकार के सचिव, संयुक्त सचिव और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित हुए। बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री ने सांसदों को पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र में वर्तमान गतिविधियों, योजनाओं के लाभ से अवगत कराया और इस क्षेत्र में पशुधन तथा डेयरी योजनाओं का बेहतर कार्यान्वयन करने के लिए विभिन्न रणनीतियों पर चर्चा की, जिससे कि बड़ी संख्या में किसानों को इस क्षेत्र से लाभ प्राप्त हो सके।

और देखें :  शीत ऋतु/ सर्दियों में गर्भित पशुओं का प्रबंधन

केन्द्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री ने बताया कि मंत्रिमंडल द्वारा हाल ही में लिए गए फैसले के अनुसार, राष्ट्रीय पशुधन मिशन और राष्ट्रीय गोकुल मिशन नामक योजनाएं अब ब्रीडर फार्म उद्यमियों और चारा उद्यमियों से संबंधित एक घटक है। आरजीएम के अंतर्गत उच्च आनुवांशिक योग्यता वाली बछियों के लिए नस्ल गुणन फार्मों के उद्यमियों को सीधे 50 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी। राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम), ग्रामीण उद्यमिता का निर्माण करने में सहायता प्रदान करेगा और साथ ही हब स्पोक मॉडल के माध्यम से 50 प्रतिशत सब्सिडी देकर बेरोजगार युवाओं और पशुपालकों के लिए मवेशी, डेयरी, मुर्गी पालन, भेड़ पालन, बकरी पालन, सुअर पालन, पशुओं के भोजन और चारा के क्षेत्र में आजीविका के बेहतर अवसर प्रदान करने में मदद करेगा तथा आत्मनिर्भर भारत का मार्ग प्रशस्त करेगा।

और देखें :  Artificial Insemination (AI) कृत्रिम गर्भाधान के लाभ

केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पुनर्निर्मित किया गया राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी) दूध की खरीद, प्रसंस्करण, विपणन और दूध एवं दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता तथा पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिसका उद्देश्य पशुधन और पोल्ट्री रोगों के खिलाफ रोगनिरोधी टीकाकरण, पशु चिकित्सा सेवाओं में क्षमता निर्माण, रोग निगरानी और पशु चिकित्सा अवसंरचना को मजबूती प्रदान करना है। इसके अलावा, राज्यों में मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों (एमवीयू) का संचालन करने से किसानों के घर-घर जाकर पशु स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में आसानी होगी।

और देखें :  पशुओं में जनन क्षमता को लम्बे समय तक बनाये रखना

केन्द्रीय मंत्री ने परिकल्पना की है कि पशुधन एवं डेयरी किसानों तक योजनाओं के लाभ को बेहतर रूप से पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और जिले के अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी में राज्यों में जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने इस बातचीत में शामिल होने के लिए सांसदों की सराहना की और उन्हें आश्वासन दिया कि इस क्षेत्र में और विकास करने के लिए उनके सुझावों को मंत्रालय द्वारा स्वीकार किया जाएगा।

यह लेख कितना उपयोगी था?

इस लेख की समीक्षा करने के लिए स्टार पर क्लिक करें!

औसत रेटिंग 5 ⭐ (451 Review)

अब तक कोई समीक्षा नहीं! इस लेख की समीक्षा करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

हमें खेद है कि यह लेख आपके लिए उपयोगी नहीं थी!

कृपया हमें इस लेख में सुधार करने में मदद करें!

हमें बताएं कि हम इस लेख को कैसे सुधार सकते हैं?

Author

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*