जुलाई/ आषाढ़: माह में पशुपालन कार्यों का विवरण

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  1. गला घोटू अर्थात घुरका तथा लंगड़ियां बुखार का टीका अवशेष पशुओं में लगवाएं।
  2. खरीफ चारा की बुवाई करें तथा अपने नजदीकी पशु चिकित्सा अधिकारी से तकनीकी जानकारी प्राप्त करें।
  3. पशुओं को अंत: कृमि नाशक औषधि पान अवश्य कराएं।
  4. वर्षा ऋतु में पशुओं के रहने की समुचित व्यवस्था करें।
  5. पशु दुहान के समय खाने का चारा डाल दें। ताकि पशु कम से कम आधा घंटा जमीन पर न बैठे जिससे थनैला रोग की रोकथाम हो सके।
  6. दूध दोहन से पूर्व एवं पश्चात थनो को 1:1000 के पोटेशियम परमैग्नेट के घोल से धोना चाहिए।
  7. पशुओं को 50 ग्राम खड़िया एवं 50 ग्राम नमक खिलाएं।
  8. पशुओं की मध्य से अंतिम गर्मी की अवस्था में कृत्रिम गर्भाधान कराएं।
  9. ब्रायलर पालन करें एवं आर्थिक लाभ बढ़ाएं।
  10. अधिक दूध देने वाले पशुओं के ब्याने के 8 से 10 दिन तक दुग्ध ज्वर होने की संभावना अधिक होती है इसलिए पशु को ब्याने के पश्चात कैल्शियम फास्फोरस का घोल 100 मिलीलीटर प्रतिदिन पिलाएं।
  11. पशुपालकों को वर्षा जनित रोगों से बचाव के उपाय करने हैं।
  12. यदि खुर पका मुंह पका गला घोटू एवं लगड़िया के टीके नहीं लगे हैं तो कृपया अब भी लगवा ले।
  13. तीन महीने पूर्व कृत्रिम गर्भाधान किए गए पशुओं का गर्भ परीक्षण कराएं एवं खाली पशुओं को समुचित जांच के उपरांत समुचित उपचार कराएं।
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