पशुओं की बीमारियाँ

नीलर्सना (ब्लूटंग) रोग कारण और लक्षण

पशुओं में कई प्रकार के रोग होते हैं जिन्हें दो प्रमुख वर्गाे में बाँटा जा सकता हैः संक्रामक रोग- जो जीवाणु, विषाणु, कवक, और परजीवी कारकों से होते हैः असंक्रामक रोग जो कि पशु की शारीरिक क्षमता, पोषक तत्वों की कमी, विषाक्तता तथा उत्पादन से जुड़ी समस्याओं के कारण होते है। >>>

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कोरोना महामारी के समय में पशुओं में गलघोटू एवं मुँह-खुर रोग टीकाकरण का महत्व

आज संपूर्ण विश्व कोरोना वायरस के संक्रमण का न केवल दंश ही झेल रहा है बल्कि इससे जनहानि भी हो रही है। इस महामारी के संक्रमण से पीड़ित व्यक्ति का कोई खास उपचार भी दिखायी नहीं दे रहा है और इसी कारण से भविष्य में इसकी खतरे की घंटी सुनाई देने से संपूर्ण विश्व इससे होने वाले संभावित खतरे से सहमा हुआ है। इस महामारी के समय जनहानि के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंदी भी छायी हुई है जिसके निकट वर्षों में भी संभलने की आशा प्रतीत नहीं हो रही है। >>>

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पशुधन क्षेत्र में एंटीबायोटिक दवाओं का व्यापक उपयोग: पारिस्थितिकी एवं स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव

प्रतिजीवी (एंटीबायोटिक) ऐसे रसायन होते हैं जो जीवाणुओं को मारते हैं एवं जीवाणुओं के संक्रमण को रोकने के लिए उपयोग किए जाते हैं। वे प्रकृति में मिट्टी के बैक्टीरिया और कवक द्वारा निर्मित होते हैं। 1940 के दशक से चिकित्सा में प्रतिजीवी उपयोग की शुरुआत के बाद से एंटीबायोटिक्स आधुनिक स्वास्थ्य सेवा में केंद्रीय रहा हैं। >>>

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डेयरी उद्योग को आर्थिक नुकसान में थनैला का योगदान: जाँच वं प्रबंधन

डेयरी गायों में थनैला (Mastitis) एक विकट समस्या हैं जो कम उत्पादन के साथ दूध की गुणवत्ता के माध्यम से महत्वपूर्ण आर्थिक नुकसान का कारण है। Mastitis डेयरी पशुओ की बीमारी  हैं जो एक सदी से अधिक समय से पहचानी जाती हैं और अभी भी जारी है जो डेयरी उद्योग को आर्थिक नुकसान का एक प्रमुख कारण है। >>>

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रोगाणुरोधी प्रतिरोध: थनैला एवं लेवटी के अन्य रोगों का घरेलु उपचार

रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial resistance) एक बहुत ही महत्वपूर्ण जनस्वास्थ्य समस्या है होने के साथ-साथ यह महत्वपूर्ण पर्यावरणीय स्वास्थ्य समस्या भी है जिसे आमतौर पर एंटीबायोटिक प्रतिरोध कहा जाता है। और वास्तव में, अब हम जानते हैं कि हमारी कई मानवीय गतिविधियों और इंजीनियर पद्दतियां, रोगाणुरोधी प्रतिरोध के स्तर को बढ़ाने में योगदान कर रही हैं। >>>

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भैसों में प्रसवोत्तर बाँझपन अवधि एक समस्या तथा बचाने के घरेलु उपाय

भैंस को खराब गुणवत्ता वाले चारे के उत्कृष्ट परिवर्तक के रूप में जाना जाता रहा है, जो कि इन्हे कठोर वातावरण के अनुकूल बनाता है और गायों की तुलना में इन्हे उष्णकटिबंधीय रोगों जैसे- , इत्यादि, से प्रतिरोध क्षमता प्रदान करता है। >>>

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डेयरी पशुओं को किट-पतंगों और मच्छरों से बचाव के लिए तकनीक

वर्षा ऋतु में कीटो पतंगों की संख्या बढ़ने से मनुष्यो और पशुओं को काफी परेशानी होती है। जिससे डेयरी पशुओं का दुग्ध उत्पादन कम हो जाता है। मनुष्यो में अनेको प्रकार के रोग  होने की संभावना होती है। इनसे बचने के लिए अनेको प्रकार के रसायन उपयोग किये  जाते हैं परन्तु अब रसायनो का प्रभाव कम होने लगा हैं। क्योकि इनके प्रति मक्छर और  किट-पतंगे पहले से अधिक प्रतिरोधी हो चुके हैं। इसलिए इन्हें मरना या भागना कठिन हो रहा हैं। पशु-पालको और ग्रामीण इलाकों में इनसे और अधिक परेशानी होती हैं। >>>

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पर्यावरण को प्रदूषित करती शोथहारी, पीड़ाहारी एवं ज्वरनाशक औषधियां

जब भी हमें दर्द, ज्वर या सूजन (शोथ) होती है तो इनको हरने के लिए औषधी लेने में तनिक भी देरी नहीं करते हैं। इसी प्रकार जब भी पशु को रोग चाहे जो भी, लेकिन इन औषधीयों का उपयोग धड़ल्ले से किया जाता है। पशु के मरणोपरान्त जब गिद्ध इनका भक्षण करते हैं तो उनकी जान को खतरा बढ़ जाता है। >>>

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सूक्ष्म जगत के कण नोबेल कोरोना वायरस (COVID-19) का हाल के वर्ष 2019-2020 में प्रकोप: पशुधन और मनुष्यो के लिए वैश्विक संकट एवं इसकी अंतर्दृष्टि

कोरोनावायरस बीमारी COVID-19 के प्रकोप के बाद से, यह रोग दुनिया भर में तेजी से फैल गया है। इस महामारी के संभावित खतरे को देखते हुए, वैज्ञानिक और चिकित्सक इस नए वायरस और पैथोफिज़ियोलॉजी को समझने के लिए दौड़ रहे हैं इस बीमारी को संभव उपचार को उजागर करने और प्रभावी चिकित्सीय एजेंटों/टीकों की खोज करने के लिए काम चल रहा हैं। >>>

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पशुओं में सर्रा रोग एवं इसके रोकथाम

सर्रा पालतू एवं जंगली पशुओं को प्रभावित करने वाले प्रमुख रोगो में से एक है। यह रोग पूरे विश्व में फैला हुआ है। भारत में इस रोग का प्रकोप सभी राज्यों में है, जिसके कारण पशुओं की उत्पादक क्षमता में प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से अत्याधिक कमी हो जाती है जिसके फलस्वरूप हमारे देशकी पषुधन अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ता है। >>>

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केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने खुरपका और मुंहपका (FMD) तथा ब्रुसेलोसिस को नियंत्रित करने की नई पहल को मंजूरी दी

31 मई 2019:  लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय >>>