पशुओं की बीमारियाँ

दुधारू पशुओं में पुनरावृति प्रजनन (रिपीट ब्रीडिंग) प्रजननहीनता का कारण

रिपीट ब्रीडर गाय वह गाय है जो सामान्य जननांग एवं सामान्य स्राव के साथ सामान्य मदकाल होने पर भी, रोगरहित उच्चकोटि साँड अथवा उच्चकोटि वीर्य द्वारा लगातार 3 या अधिक से बार गर्भित कराने पर गर्भ धारण >>>

पशुओं की बीमारियाँ

रोमन्थी पशुओ मे अफरा रोग

जुगाली करने वाले पशु जैसे की गाय, भैस बकरी एवं भेड़ मे अफरा एक आम समस्या है l इनके पेट (रुमेन) मे भोज्य पदार्थो के पाचन के दौरान गैस एवं अम्ल का बनना एक सामान्य प्रक्रिया है ओर ऐसा प्रति दिन चलते >>>

पशुओं की बीमारियाँ

गौ पशुओं में लंपी स्किन डिजीज: लक्षण एवं रोकथाम

लंपी स्किन डिजीज एक विषाणु जनित बीमारी है, जो पॉक्सवायरस से होती है। सितंबर 2020 में भारत में पहली बार इसका प्रसार हुआ था।इसमे मृत्यु दर लगभग 5% है परंतु इसका प्रसार काफी अधिक है। यह एक नई उभरती हुई >>>

पशुओं की बीमारियाँ

पशुओं में रूमिनल टिमपेनी के लक्षण एवं उपचार

अत्यधिक मात्रा में आसानी से किण्वित हो जाने वाले खाद्य पदार्थो को खाने से सामान्य से अधिक मात्रा में गैसों का उत्पादन होता है। किण्वन से बनी इन गैसों से भर जाते हैं, इस अवस्था को आफरा/टिमपेनी/ब्लोट >>>

पशुओं की बीमारियाँ

समय बद्ध कृत्रिम गर्भाधान हेतु ओवम सिंक्रोनाइजेशन की विधियां

समय बद्ध कृत्रिम गर्भाधान हेतु जीपीजी विधि का प्रयोग पशु चिकित्सा अधिकारी या तो स्वयं करें अथवा अपनी निगरानी में करवाएं। इस विधि का प्रयोग पशु के गर्मी पर आने के पश्चात 7 से 11 दिन के बीच प्रारंभ कर >>>

पशुओं की बीमारियाँ

दुग्ध ज्वर: दुधारू पशुओं की प्रमुख समस्या

दुग्ध ज्वर इन्ही बिमारियों में से एक है जो दुधारू पशुओं को मुख्यतः प्रभावित करती है, यह रोग अन्य कई बिमारियों का ‘प्रवेश द्वार’ भी है। यह रोग पशुओं की दुग्ध उत्पादकता को कम करने के अलावा प्रजनन में भी बाधक बनता है। दुग्ध ज्वर एक मेटाबोलिक या उपापचयी रोग है जिसे अंग्रेजी भाषा में ‘Milk Fever’ और  आम बोल चाल की भाषा में ‘सुन्नपात’ भी कहा जाता है।  >>>

पशुओं की बीमारियाँ

गाय एवं भैंस के नवजात बच्चों की मृत्यु के मुख्य कारण:

अधिकांश नवजात बच्चों की मृत्यु पाचन तंत्र की समस्याओं के कारण होती है तथा इससे कम श्वसन तंत्र की समस्याओं के कारण होती हैं। जन्म के बाद नवजात बच्चों की मृत्यु का प्रमुख कारण पशुपालक द्वारा बच्चे को >>>

पशुओं की बीमारियाँ

डेयरी पशुओं में मध्य मदचक्र अर्थात मिड साइकिल हीट की समस्या का समाधान

पशु को अंतिम बार कृत्रिम गर्भाधान के 10 या 11 दिन पश्चात यदि पशु दोबारा गर्मी में आता है। तो गुदा परीक्षण करने पर गर्भाशय की टोन मध्यम श्रेणी की रहती है और अंडाशय के परीक्षण पर एक या एक से अधिक >>>

पशुओं की बीमारियाँ

डेयरी पशुओं में योनि की सूजन (Vaginitis) कारण, लक्षण एवं उपचार

योनि में सूजन मुख्यतः तीन प्रकार की पाई जाती है : 1. जूविनाइल वेजाइनाइटिस मुख्य रूप से भैंस की ओसर जो प्रीप्यूबर्टल अवस्था में जब अंडाशय के पुटक विकसित होना प्रारंभ होते हैं और स्क्वैमस एपीथिलियम >>>

पशुओं की बीमारियाँ

बछड़ों को पेशाब रुकने अर्थात पेशाब के बंधे से कैसे बचाएं?

सर्दियों के दिनों में अक्सर बछड़ों एवं कटड़ों को पेशाब के रुकने से होने वाली परेशानी बंधे से बचाने के लिए नौसादर का प्रयोग उपयुक्त माना गया है। जैसा कि हम सभी जानते हैं सर्दियों में पेशाब का रुकना >>>

पशुओं की बीमारियाँ

पशुओं में पुछकटवा रोग या डेगनाला रोग

दुधारू पशुओं में डेगनाला बीमारी की संभावना नवंबर से फरवरी के बीच अधिक रहती है।पशुओं में कुछ कटवा रोग या डेगनाला रोग मुख्यतः भैंस जाति के पशुओं में होता है । परंतु गोवंश के पशु भी इस संक्रमण के शिकार >>>

पशुओं की बीमारियाँ

भेड़, बकरियों में पी.पी.आर. महामारी के कारण, लक्षण एवं रोकथाम

पेस्ट डेस पेटिटस रूमिनेंट्स (पी.पी.आर.) बकरियों एवं भेड़ों मैं फैलने वाला एक विषाणु जनित संक्रामक एवं अत्यंत ही घातक बीमारी है। इस रोग में सामूहिक रूप से झुंड की भेड़, बकरियों की मृत्यु हो जाती है। >>>

पशुओं की बीमारियाँ

शीत ऋतु/सर्दियों में दुधारू एवं नवजात पशुओं का प्रबंधन

सर्दियों में पशुओं के रहन-सहन और उनके आहार का समुचित प्रबंधन करना नितांत आवश्यक है। यदि पशुओं के रहन-सहन और आहार का उचित प्रबंध इस प्रतिकूल मौसम में नहीं किया जाए तो पशु के स्वास्थ्य एवं दुग्ध >>>

पशुओं की बीमारियाँ

पशुओं में होनें वाले बिस्सी रोग (फैष्योलोसिस या लिवर फ्लूक रोग) और उससे बचाव

यह रोग यकृत में पाए जाने वाले फेसियोला प्रजाति के चपटे , पत्ती के आकर के हल्के या गहरे भूरे रंग के पैरासाइट द्वारा होता है। इसकी एक प्रजाति पहाड़ी व पर्वतीय इलाकों में रह रहे पशुओं में पाई जाती है >>>