मुर्गियों में खनिज एवं विटामिन्स की कमी से होने वाले रोग एवं उससे बचाव
खनिज लवण मुर्गियों के स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते है। यह शरीर निर्माण के साथ-साथ मुर्गियों के वृद्धि, विकास एवं उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते >>>
खनिज लवण मुर्गियों के स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते है। यह शरीर निर्माण के साथ-साथ मुर्गियों के वृद्धि, विकास एवं उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते >>>
रक्त परजीवी पशुयों को शारीरिक रूप से कमजोर करके उनकी उत्पादन तथा कार्यक्षमता को कम कर देते हैं। यदि समय पर इलाज न कराया जाए तो पशुयों की मृत्यु भी हो जाती है। कुछ रक्त परजीवी तो बहुत ही घातक होते है, जिनके संक्रमण से पशुयों की मृत्युदर बहुत होती है। >>>
नेजल सिसटोसोमोसिस या नेजल ग्रेनुलोमा या नकरा रोग, सिस्टोसोमा नेजेली नामक चपटा कृमि के कारण होता है। इस कृमि को खूनी फ्लूक भी कहा जाता हैं क्योंकि सिस्टोसोमा नेजेली कृमि प्रभावित पशुओं की नाक की शिरा में रहता है। इस रोग का प्रकोप गाय एवं बैल में, भैंस की अपेक्षा अधिक होता है। >>>
बाढ़ की विभीषिका अब प्रति वर्ष बिहार के लिए पर्याय बन गई है जो प्रति वर्ष बिहार के किसी न किसी हिस्से को तबाह कर रही है। इस वर्ष भी बाढ़ गंगा एवं अन्य नदियों के तटवर्ती बिहार के सभी जिलों में भयावह रूप लेकर आई है। तटवर्ती जिलों की आधी से अधिक आबादी और पशु बाढ़ से प्रभावित हैं। बाढ़ के समय पशुओं को बचाने के प्रयास किए गए हैं परन्तु बाढ़ के उपरान्त पशुओं में अनेक बिमारियों के होने की संभावना बनी रहती है। >>>
भारत एक कृषि प्रधान देश है। जिसने कृषि के साथ-साथ पशुपालन को एक संलग्न व्यवसाय के रूप में अपना रखा है। निरन्तर जनसंख्या बढने के कारण मानव जाति जंगलों को काटकर तथा कृषि योग्य भूमि मे घर बनाकर रहना शुुरु कर दिया है। >>>
मादा पशुओं में प्रजनन अंगों के योनि द्वार से बाहर आने से पशु एवं पशुपालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। शाब्दिक भाषा में इस समस्या को योनिभ्रंश कहते हैं, जबकि आम बोल-चाल की भाषा में फूल दिखाना, पीछा दिखाना, शरीर दिखाना, गात दिखाना इत्यादि नामों से जाना जाता है। >>>
गौ-भैंसवंशीय पशुओं में होने वाली फूट एंड माउथ डिसिज (एफ एम डी) और ब्रूसेला डिसिज >>>
छत्तीसगढ़, बलौदाबाजार, कलेक्टर श्री कार्तिकेया गोयल ने अभियान चलाकर बरसात के आगमन के पहले पशुओं >>>
प्रतिजीवी (एंटीबायोटिक) ऐसे रसायन होते हैं जो जीवाणुओं को मारते हैं एवं जीवाणुओं के संक्रमण को रोकने के लिए उपयोग किए जाते हैं। वे प्रकृति में मिट्टी के बैक्टीरिया और कवक द्वारा निर्मित होते हैं। 1940 के दशक से चिकित्सा में प्रतिजीवी उपयोग की शुरुआत के बाद से एंटीबायोटिक्स आधुनिक स्वास्थ्य सेवा में केंद्रीय रहा हैं। >>>
डेयरी गायों में थनैला (Mastitis) एक विकट समस्या हैं जो कम उत्पादन के साथ दूध की गुणवत्ता के माध्यम से महत्वपूर्ण आर्थिक नुकसान का कारण है। Mastitis डेयरी पशुओ की बीमारी हैं जो एक सदी से अधिक समय से पहचानी जाती हैं और अभी भी जारी है जो डेयरी उद्योग को आर्थिक नुकसान का एक प्रमुख कारण है। >>>
रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial resistance) एक बहुत ही महत्वपूर्ण जनस्वास्थ्य समस्या है होने के साथ-साथ यह महत्वपूर्ण पर्यावरणीय स्वास्थ्य समस्या भी है जिसे आमतौर पर एंटीबायोटिक प्रतिरोध कहा जाता है। और वास्तव में, अब हम जानते हैं कि हमारी कई मानवीय गतिविधियों और इंजीनियर पद्दतियां, रोगाणुरोधी प्रतिरोध के स्तर को बढ़ाने में योगदान कर रही हैं। >>>
भैंस को खराब गुणवत्ता वाले चारे के उत्कृष्ट परिवर्तक के रूप में जाना जाता रहा है, जो कि इन्हे कठोर वातावरण के अनुकूल बनाता है और गायों की तुलना में इन्हे उष्णकटिबंधीय रोगों जैसे- , इत्यादि, से प्रतिरोध क्षमता प्रदान करता है। >>>
जब भी हमें दर्द, ज्वर या सूजन (शोथ) होती है तो इनको हरने के लिए औषधी लेने में तनिक भी देरी नहीं करते हैं। इसी प्रकार जब भी पशु को रोग चाहे जो भी, लेकिन इन औषधीयों का उपयोग धड़ल्ले से किया जाता है। पशु के मरणोपरान्त जब गिद्ध इनका भक्षण करते हैं तो उनकी जान को खतरा बढ़ जाता है। >>>
सर्रा पालतू एवं जंगली पशुओं को प्रभावित करने वाले प्रमुख रोगो में से एक है। यह रोग पूरे विश्व में फैला हुआ है। भारत में इस रोग का प्रकोप सभी राज्यों में है, जिसके कारण पशुओं की उत्पादक क्षमता में प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से अत्याधिक कमी हो जाती है जिसके फलस्वरूप हमारे देशकी पषुधन अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ता है। >>>