पशुओं की बीमारियाँ

पशुओं में होनें वाले संक्रामक रोगों से बचाव

पशुओं में संक्रामक रोगों से बचाव हेतु  निम्नलिखित उपाय अपनाने चाहिए: प्रथक्करण- संक्रामक रोग का संदेह होते ही रोगी पशु को स्वस्थ्य पशु से अलग कर देना चाहिए। रोगी पशु को एक अलग जगह बाँध कर उसे स्वस्थ पशुओं के साथ ना ही बाँधना चाहिए और ना ही उनके साथ बाहर घूमने देना चाहिए। >>>

पशुओं में होनें वाले मोतियाबिन्द एवं अन्धापन रोग और उससे बचाव
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पशुओं में होनें वाले मोतियाबिन्द एवं अन्धापन रोग और उससे बचाव

पशुओं की आँख के लेन्स में उजलापन या धुँघलापन आना मोतियाबिन्द कहलाता है। इस रोग से प्रभावित पशु के आँख से घुँघला दिखायी पड़ता है तथा धीरे-धीरे पशु अन्धा हो जाता है। रोग का कारण एवं प्रकार यह रोग >>>

पशुओं में होनें वाले लंगड़िया रोग एवं उससे बचाव
पशुओं की बीमारियाँ

पशुओं में होनें वाले लंगड़िया रोग एवं उससे बचाव

पशुओं में होनें वाले लंगड़िया रोग को अलग-अलग क्षेत्रों में लगड़ी , सुजवा , जहरवाद आदि नामों से पुकारा जाता है। अंगरेजी में इसे ब्लैक क्वार्टर (BQ) कहते है। यह गाय और भैंसो की छूत की बीामारी है , जो >>>

पशुओं के संक्रामक रोग लक्षण एवं रोकथाम
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पशुओं के संक्रामक रोग लक्षण एवं रोकथाम

संक्रामक रोग सभी पशु और पक्षियों में फैलते हैं और इसका प्रभाव यह होता है की पशुपालक अपनी आर्थिक छति से उबर नहीं पाता है अतः बचाव ही मात्र एक समाधान है। कहा जाता है की बीमारी की रोकथाम उपचार से बेहतर है >>>

बकरियों एवं भेड़ों की महामारी: पी.पी.आर.
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बकरियों एवं भेड़ों की महामारी: पी.पी.आर.

वर्तमान परिदृश्य में बकरी और भेड़ पालन गरीब मजदूर पशुपालकों की आजीविका का एक प्रमुख साधन है। बकरियों को गरीब की गाय भी कहा जाता है। बकरी और भेड़ की संक्रामक बीमारियों में पी.पी.आर. महामारी का प्रकोप >>>

दुधारू पशुओं में ऊष्मीय तनाव का समुचित प्रबंधन
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दुधारू पशुओं में ऊष्मीय तनाव का समुचित प्रबंधन

पशुओं के शरीर की ऊष्मा छय करने की क्षमता व प्राकृतिक क्रियाओं से शारीरिक तापमान नियंत्रित नहीं हो पाता तो उसे उष्मीय तनाव अथवा हीट स्ट्रेस कहा जाता है >>>

पशुओं के सामान्य रोग एवं उनके सामान्य उपचार
पशुओं की बीमारियाँ

पशुओं के सामान्य रोग एवं उनके सामान्य उपचार

पशुओं के सामान्य रोग: इंपैक्शन ऑफ रूमेन, टिंपैनी अथवा अफारा, डायरिया/ दस्त, कब्ज, नाक से खून आना, पैंटिंग/हॉफना, ट्राउमेटिक पेरिकार्डाइटिस, पेट के कीड़े अर्थात पटेरे पडना, कीड़े युक्त घाव, सींग टूटना >>>

Cervicitis
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पशुओं में गर्भाशय ग्रीवा का शोथ (Cervicitis): कारण एवं निवारण

गाय-भैंसों में गर्भाशय ग्रीवा की सूजन, गर्भाशयशोथ (Cervicitis) के कारण होती है। इसके अतिरिक्त असामान्य प्रसव, गर्भपात, समय से पहले बच्चा देना, कठिन प्रसव या फिटोटोमी के समय, बच्चे की ज्यादा खींचतान >>>

कोविड-19 लॉक डाउन के दौरान पशुओं के सामान्य रोग एवं उनका प्राथमिकघरेलू उपचार
पशुओं की बीमारियाँ

कोविड-19 लॉक डाउन के दौरान पशुओं के सामान्य रोग एवं उनका प्राथमिक/घरेलू उपचार

कोविड-19 लॉक डाउन के दौरान कई बार पशुपालक अपने पशुओं के बीमार होने पर शीघ्र पशुचिकित्सक को बुलाकर इलाज़ नहीं करा पाते हैं, इससे पशुपालकों को नुकसान भी उठाना पड़ जाता है। ऐसे समय में पशुपालक यदि कुछ >>>

सालमोनेलोसिस एक पशुजन्य बीमारी: कारण, उपचार एवं नियंत्रण
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सालमोनेलोसिस एक पशुजन्य बीमारी: कारण, उपचार एवं नियंत्रण

सालमोनेलोसिस को, टाइफाइड, पैराटायफाइड फीवर एवं एंटरिक फीवर भी कहते हैं। यह एक भयंकर अति संक्रामक रोग है जो सालमोनेला प्रजाति के जीवाणु द्वारा फैलता है। यह लगभग अधिकांश प्रकार के पशुओं में पाया जाता >>>

पशुओं की बीमारियाँ

गर्मी एवं बरसात के मौसम में पशुओं में होने वाले पशु रोग एवं उनसे बचाव

गर्मी के मौसम में होने वाले पशु रोग अत्याधिक गर्मी के कारण लू लगना। गर्मी के कारण स्ट्रेस यानी व्याकुलता। पशुओं में किलनी/कलीली आदि का लगना। पशुओं के पेट में कीड़े पड़ना। पशुओं में दस्त >>>

पशुओं की बीमारियाँ

गाय भैंस के नवजात बच्चों के अतिसार (काफ स्कॉर) का प्रबंधन

नवजात बछड़ों एवं बछियों में, होने वाले अतिसार को कोलीसेप्टिसीमिया, सेपटीसीमिक कोलीबेसिलोसिस एवं काफ स्कॉर के नाम से भी जाना जाता है। यह बीमारी प्रबंधन की कमी के कारण उत्पन्न हुई मानी जा सकती है। >>>

पशुओं में गर्भाशय की जड़ता कारण एवं निवारण
पशुओं की बीमारियाँ

पशुओं में गर्भाशय की जड़ता: कारण एवं निवारण

यदि बच्चा देने की शुरुआत होने पर या बच्चा देने के समय गर्भाशय के संकुचन कमजोर हो या अनुपस्थित हो तो इस स्थिति को गर्भाशय की जड़ता अर्थात यूटेराइन इनरशिया कहते हैं। यह दो प्रकार का होता है प्राथमिक >>>

पशुओं की बीमारियाँ

पशुओं में जेर रुकने की समस्या: कारण एवं समाधान

पशुओं में जेर रुकने की समस्या: ब्याने के 8 से 12 घंटे तक जेर यदि अपने आप नहीं निकलती तभी इसे जेर का रुकना माना जाता है। >>>