स्वदेशी नस्लों के संरक्षण के लिए सरकार ने स्थापित किये दो राष्ट्रीय कामधेनु प्रजनन केंद्र

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16 जुलाई 2019: स्वदेशी नस्लों के संरक्षण के लिए सरकार ने दो राष्ट्रीय कामधेनु प्रजनन केंद्र (National Kamdhenu Breeding Center- NKBC) की स्थापना की है। पहला उत्तरी क्षेत्र के लिए मध्य प्रदेश में होशंगाबाद के इटारसी में तथा दूसरा दक्षिणी क्षेत्र के लिए आंध्र प्रदेश के नैल्लोर में चिंतालदेवी में स्थापित किया गया है। राष्ट्रीय कामधेनु प्रजनन केंद्र स्वदेशी गौवंशीय एवं महिषवंशीय नस्लों के जर्मप्लाज्म की आपूर्ति हेतु स्टोरेज सेंटर के रूप में कार्य करेगा।

राष्ट्रीय कामधेनु प्रजनन केंद्र के मुख्य उद्देश्य

  1. स्वदेशी गौवंशीय एवं महिषवंशीय नस्लों के संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ उनकी उत्पादकता बढ़ाना।
  2. इन नस्लों के आगे प्रसार के लिए प्रमाणिक उच्च गुणवत्ता के जर्मप्लाज्म की आपूर्ति करना।
  3. विलुप्ति की कगार पर खड़ी स्वदेशी गौवंशीय एवं महिषवंशीय नस्लों को विलुप्त होने से बचाना।
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राष्ट्रीय कामधेनु प्रजनन केंद्र इटारसी तथा चिंतालदेवी के लिए कुल रुपये 50 करोड़ (25 करोड़ प्रति केंद्र) का बजट आबंटित किया गया है।

राष्ट्रीय कामधेनु प्रजनन केंद्र चिंतालदेवी, आंध्र प्रदेश में 17 गौवंशीय नस्लों (देवनी, गिर, कंकरेज, लाल सिंधी, साहीवाल, राठी, थारपारकर, पुंगनुर, ओंगोले, कृष्णा वैली, मलनाड गिद्दा और कांज्यम) तथा 5 गौवंशीय नस्लों (पंढरपुरी, जाफराबादी, बन्नी, मेहसाणा, और मुर्राह) का प्रबंधन किया जा रहा है। इस केंद्र पर एम्ब्रियो ट्रांसफर टेक्नोलॉजी (Embryo Transfer Technology) के लिए प्रशिक्षण सुविधाओं के साथ बिल्डिंग, इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन क्षमता वाली प्रयोगशाला का निर्माण पूरा हो गया है।

राष्ट्रीय कामधेनु प्रजनन केंद्र इटारसी, मध्य प्रदेश में 300 एकड़ भूमि पर निर्म्मान कार्य प्रगति पर है तथा केंद्र में 11 गौवंशीय नस्लों (साहिवाल, गिर, मालवी, निमरी, कंकरेज, हरियाण और राठी) और  4 गौवंशीय नस्लों (जाफराबादी, मुर्रा, नील रावि और भदावरी) के 104 पशुओं के क्षेत्र में स्थापित किया जा रहा है। ) का प्रबंधन किया जा रहा है।

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